भारतीय पारिस्थितिकी विद डॉ. कमल बावा का चयन वर्ष 2014 के जैव विविधता के लिए मिदोरी पुरस्कार के लिए किया गया. इसकी घोषणा जापान स्थित एईओन एनवायरनमेंटल फांउडेशन द्वारा 8 सितंबर 2014 को की गई. उनका चयन हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और जैव-विविधता में उल्लेखनीय अनुसंधान के लिए किया गया.
डॉ. कमल बावा के अतिरिक्त दो अन्य विजेता- डॉ. बिबियना विला एवं डॉ. अल्फ्रेड ओटेन्ग येबोह हैं. पुरस्कार के रूप में इन वैज्ञानिकों को लकड़ी की एक पट्टी, एक प्रतीक चिह्न और 1,00,000
अमेरिकी डॉलर की नगद धन राशि प्रदान की जाएगी.
इन्हें यह पुरस्कार दक्षिण कोरिया के प्योंगचांग में अक्टूबर 2014 में आयोजित कॉप-12 के दौरान दिया जाएगा.
यह पुरस्कार जापान स्थित एईओन एनवायरनमेंटल फांउडेशन द्वारा दिया जाता है. एओन इन्वायरनमेंटल फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2010 में स्थापित जैव विविधता के लिए मिदोरी पुरस्कार प्रति दो वर्ष बाद वैश्विक, क्षेत्रीय या स्थानीय स्तरों पर जैव विविधता के संरक्षण एवं स्थायी उपयोग को लेकर असाधारण योगदान देने वाले केवल तीन लोगों को दिया जाता है.
डॉ. कमल बावा से सम्बंधित तथ्य
भारतीय मूल के जीव वैज्ञानिक डॉ. कमल बावा भारत में कर्नाटक के बेंगलुरू स्थित गैर सरकारी थिंकटैंक, अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकॉलॉजी एंड एनवायरमेंट (एट्री) के संस्थापक और उसके अध्यक्ष हैं. वह युनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स, बोस्टन में जीव विज्ञान के प्रोफेसर हैं.
पर्यावरण विद डॉ.कमल बावा को वैश्विक सतत विकास की दिशा में विज्ञान के क्षेत्र में किए गए उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2012 में पहला गुनेरस अवार्ड इन सस्टैनिबिलिटी साइंस (Gunnerus Award in Sustainability Science) दिया गया जो एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार था. यह पुरस्कार डीकेएनवीएस के संस्थापक बिशप जॉन अर्नस्ट गुनेरस (1718-1773) के नाम पर स्थापित किया गया. यह पुरस्कार रॉयल नॉर्वेजियन सोसायटी ऑफ साइंसेस एंड लेटर्स (डीकेएनवीएस) द्वारा प्रति दो वर्ष बाद दिया जाता है.
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में स्थिरता विज्ञान में रफोलो जॉर्जियो फेलोशिप और बुलार्ड फेलोशिप प्राप्त थी.
इन्हें यह पुरस्कार दक्षिण कोरिया के प्योंगचांग में अक्टूबर 2014 में आयोजित कॉप-12 के दौरान दिया जाएगा.
यह पुरस्कार जापान स्थित एईओन एनवायरनमेंटल फांउडेशन द्वारा दिया जाता है. एओन इन्वायरनमेंटल फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2010 में स्थापित जैव विविधता के लिए मिदोरी पुरस्कार प्रति दो वर्ष बाद वैश्विक, क्षेत्रीय या स्थानीय स्तरों पर जैव विविधता के संरक्षण एवं स्थायी उपयोग को लेकर असाधारण योगदान देने वाले केवल तीन लोगों को दिया जाता है.
डॉ. कमल बावा से सम्बंधित तथ्य
भारतीय मूल के जीव वैज्ञानिक डॉ. कमल बावा भारत में कर्नाटक के बेंगलुरू स्थित गैर सरकारी थिंकटैंक, अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकॉलॉजी एंड एनवायरमेंट (एट्री) के संस्थापक और उसके अध्यक्ष हैं. वह युनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स, बोस्टन में जीव विज्ञान के प्रोफेसर हैं.
पर्यावरण विद डॉ.कमल बावा को वैश्विक सतत विकास की दिशा में विज्ञान के क्षेत्र में किए गए उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2012 में पहला गुनेरस अवार्ड इन सस्टैनिबिलिटी साइंस (Gunnerus Award in Sustainability Science) दिया गया जो एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार था. यह पुरस्कार डीकेएनवीएस के संस्थापक बिशप जॉन अर्नस्ट गुनेरस (1718-1773) के नाम पर स्थापित किया गया. यह पुरस्कार रॉयल नॉर्वेजियन सोसायटी ऑफ साइंसेस एंड लेटर्स (डीकेएनवीएस) द्वारा प्रति दो वर्ष बाद दिया जाता है.
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में स्थिरता विज्ञान में रफोलो जॉर्जियो फेलोशिप और बुलार्ड फेलोशिप प्राप्त थी.
विदित हो कि कॉप-12 की उच्च स्तरीय बैठक दक्षिण कोरिया के प्योंगचांग में 15 अक्टूबर 2014 को आयोजित की जानी है. इस बैठक के दौरान कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज (कॉप-11) के वर्तमान अध्यक्ष भारत द्वारा कॉप-12 की अध्यक्षता दक्षिण कोरिया को सौंपी जानी है. कॉप-12 की बैठक का विषय-‘सतत विकास के लिए जैव विविधता’ (बायोडायवर्सिटी फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट) रखा गया.
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