देश की पहली मध्यम दूरी तक मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि प्रथम का 11 सितंबर 2014 को ओडिशा के व्हीलर तट के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आइटीआर) से सफल परीक्षण किया गया. यह मिसाइल सतह से सतह पर 700 से 900 किलोमीटर की दूरी तक हमला कर सकती है. बारह मीटर लंबी यह मिसाइल एक टन का परमाणु वॉरहेड अपने साथ ले जाने में सक्षम है.
अग्नि प्रथम में तरल और ठोस दोनों तरह के ईंधन का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस मिसाइल की रफ्तार 2.5 किलोमीटर प्रति सेकंड है. इसे रेल और मोबाइल लांचर के जरिए प्रक्षेपित किया जा सकता है.
अग्नि-1 मिसाइल से संबंधित मुख्य तथ्य
अग्नि-1 मिसाइल डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी तकनीक से विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली परमाणु सक्षम मिसाइल है. 15 मीटर लंबी व 12 टन वजन की यह मिसाइल 11 क्विंटल भार के पारंपरिक तथा परमाणु आयुध ले जाने में समक्ष है. अग्नि-1 को डीआरडीओ की प्रमुख मिसाइल विकास प्रयोगशाला "एडवास्ड सिस्टम्स लैबोरैटरी" (एएसएल) द्वारा रक्षा अनुसंधान विकास प्रयोगशाला और अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई) के सहयोग से विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) हैदराबाद द्वारा एकीकृत किया गया था.
अग्नि-1 मिसाइल डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी तकनीक से विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली परमाणु सक्षम मिसाइल है. 15 मीटर लंबी व 12 टन वजन की यह मिसाइल 11 क्विंटल भार के पारंपरिक तथा परमाणु आयुध ले जाने में समक्ष है. अग्नि-1 को डीआरडीओ की प्रमुख मिसाइल विकास प्रयोगशाला "एडवास्ड सिस्टम्स लैबोरैटरी" (एएसएल) द्वारा रक्षा अनुसंधान विकास प्रयोगशाला और अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई) के सहयोग से विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) हैदराबाद द्वारा एकीकृत किया गया था.
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