भारत ने 8 जुलाई 2014 को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का ओडिशा स्थित चांदीपुर टेस्टिंग
रेंज से सफल परिक्षण किया. इस मिसाइल का परीक्षण बालासोर एकीकृत परीक्षण रेंज
(आईटीआर) से एक मोबाइल लांचर द्वारा किया गया.
इस मिसाइल को भारतीय वायु सेना में वर्ष 2005 में शामिल किया जा चुका है. हालांकि वायु सेना में मिसाइल परीक्षण अंतिम
चरण में है. आर्मी और नेवी में भी यह मिसाइल पहले से ही शामिल है. इस मिसाइल को
आईएनएस राजपूत पर तैनात किया गया है.
भारतीय सेना ने वर्ष 2007 के प्रारंभ में
ब्रह्मोस मिसाइल का पहला रेजिमेंट एन816 (ए1) मिसाइल रेजिमेंट प्राप्त किया था.
वर्तमान में हवा के साथ साथ मिसाइल के पनडुब्बी संस्करण को
विकसित करने का कार्य भारत और रूस के संयुक्त संस्करण कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस
में चल रहा है.
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का विवरण
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भारत की सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस 290 किलोमीटर तक मार कर सकती है.
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यह मिसाइल अपने साथ 300 किलोग्राम यानी 2 टन वजन का वॉरहेड ले जाने में
सक्षम है.
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यह मिसाइल “दागो और भूल जाओ” के सिद्धांत पर कार्य करती है.
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इस मिसाइल में थोड़ा बहुत बदलाव
करके इसे किसी भी जहाज और पनडुब्बी पर लगाया जा सकता है.
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ब्रह्मोस 2.8 माक की शीर्ष गति के साथ अमेरिका के सबसोनिक टॉमहॉक क्रूज मिसाइल की तुलना
में लगभग तीन गुना तेज है.
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यह मिसाइल हवा से दोगुनी गति से तय
लक्ष्य पर पहुंच कर उसे नेस्त नाबूद करने की क्षमता रखती है.
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ब्रह्मोस का नाम दो नदियों अर्थात्
भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा के नाम पर रखा गया है.
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