पांच नाभिकीय शक्ति संपन्न
और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों (अमेरिका, रूस,
चीन, ब्रिटेन और फ्रांस) ने 6 मई 2014 को न्यूयॉर्क में मौजूदा मध्य एशियाई
नाभिकीय हथियार मुक्त क्षेत्र (सीएएनडब्ल्यूएफजे) संधि के एक नए प्रोटोकॉल पर
हस्ताक्षर किए. प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने के एजेंडे में पांच केंद्रीय एशियाई
देशों अर्थात् कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान में एक
परमाणु मुक्त क्षेत्र का निर्माण करना था.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा
परिषद के पांच सदस्य देश भी इन मध्य एशियाई देशों के राज्य क्षेत्र पर परमाणु
हथियारों के उत्पादन, खरीद और नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाने के लिए सहमत हो गए हैं.
लेकिन यह प्रोटोकॉल नाभिकीय ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर प्रतिबंध नहीं लगाता
हैं.
इसके अतिरिक्त यह प्रोटोकॉल
नाभिकीय शक्ति संपन्न राष्ट्रों को सीएएनडब्ल्यूएफजे संधि पक्षों (कजाखस्तान, किर्गिस्तान,
ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान)
के विरुध्द नाभिकीय हथियारों का प्रयोग या परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने के
लिए उन्हें धमकी देने को कानूनी रूप से बांधता है. संधि के लिए पक्षों के खिलाफ
परमाणु हथियारों का उपयोग न करने की जिम्मेदारी के लिए नकारात्मक जिम्मेदारी शब्द
का प्रयोग किया गया है.
संयुक्त राज्य अमेरिका
सीएएनडब्ल्यूएफजे संधि हेतु एक पक्ष नहीं हो सकता लेकिन एक एनपीटी परमाणु आयुध
राज्य के रूप में संधि के प्रोटोकॉल में शामिल होने के लिए के योग्य है.यह समझौता 2015 में
होने वाले परमाणु अप्रसार संधि समीक्षा सम्मेलन की दो सप्ताह की तैयारी बैठक के मौके पर हुआ.
मध्य एशियाई परमाणु हथियार
मुक्त क्षेत्र (सीएएनडब्ल्यूएफजे) संधि
सीएएनडब्ल्यूएफजे संधि मध्य
एशियाई राष्ट्रों (कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान) के लिए
एक कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रतिबद्धता है जो परमाणु हथियारों के निर्माण,
अधिग्रहण, परीक्षण, या
स्वामित्व को नहीं करने की मांग करता हैं.
इस संधि पर सेमीपलातिन्स्क
(कजाखस्तान स्थित एक प्रमुख सोवियत परमाणु स्थल), में 8 सितम्बर
2006 को हस्ताक्षर किए गए थे. इसलिए इसे सेमीपलातिन्स्क के
संधि, सेमे की संधि या सेमी की संधि के नाम से भी जाना जाता
हैं. इस संधि में किर्गिस्तान, उजबेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान और कजाखस्तान शामिल हैं
एवं यह 21 मार्च 20009 को लागू हुई. यह
उत्तरी गोलार्ध मे स्थित दुनिया का पहला परमाणु मुक्त क्षेत्र है.
यह संधि और इसके प्रोटोकॉल
क्षेत्र के लोगों के विकास और समृद्धि के लिए आवश्यक हालात बनाने के लिए क्षेत्रीय
सहयोग, सुरक्षा, स्थिरता और शांति को बढ़ावा
देंगे. सीएएनडब्ल्यूएफजे संधि एनपीटी पूरक हैं और यह अन्य बातों के अलावा मध्य
एशिया के भीतर परमाणु हथियारों के विकास और परीक्षण पर रोक लगाकर अंतरराष्ट्रीय
अप्रसार व्यवस्था को बढ़ाता है. संधि के तहत, पाँच मध्य
एशियाई राष्ट्र अपने प्रदेशों के भीतर परमाणु हथियारों की तैनात की अनुमति नहीं
देंगे. इन राष्ट्रों को भी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के अतिरिक्त
प्रोटोकॉल अपनाने आवश्यक हैं. यह प्रोटोकॉल आईएईए को विस्तारित पहुँच और
प्राधिकारियों के विस्तार जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके की सभी परमाणु
गतिविधियों का प्रयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जा रहा हैं, करता हैं.
परमाणु हथियार मुक्त
क्षेत्र पर चार अन्य संधियों और हैं –
• तलातेलोल्को की संधि - लैटिन अमेरिका और कैरिबियन
• रारोटोंगा की संधि - दक्षिण प्रशांत
• बैंकाक की संधि - दक्षिण पूर्व एशिया
• पेलिन्दबा की संधि – अफ्रीका (अभी तक लागू नहीँ हुई हैं इसको लागू होने के लिए 2 देशों के अनुसमर्थन की आवश्यकता हैं)
• रारोटोंगा की संधि - दक्षिण प्रशांत
• बैंकाक की संधि - दक्षिण पूर्व एशिया
• पेलिन्दबा की संधि – अफ्रीका (अभी तक लागू नहीँ हुई हैं इसको लागू होने के लिए 2 देशों के अनुसमर्थन की आवश्यकता हैं)
सीएएनडब्ल्यूएफजे के सदस्य
देशों के लिए व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) का अनुपालन करना भी
आवश्यक हैं.
मंगोलिया द्वारा स्वयं घोषित परमाणु मुक्त स्थिति को भी एक संयुक्त राष्ट्र महासभा संकल्प के माध्यम से स्वीकार किया जा चुका है.
परमाणु हथियार अप्रसार (एनपीटी) के बारे में
मंगोलिया द्वारा स्वयं घोषित परमाणु मुक्त स्थिति को भी एक संयुक्त राष्ट्र महासभा संकल्प के माध्यम से स्वीकार किया जा चुका है.
परमाणु हथियार अप्रसार (एनपीटी) के बारे में
परमाणु हथियार अप्रसार संधि
(एनपीटी) को 1 जुलाई 1968 को हस्ताक्षर के लिए खोला
गया था. संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, सोवियत संघ, और 59 अन्य देशों
में 1968 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए. एनपीटी सबसे व्यापक
रूप से स्वीकार किए जाने वाला शस्त्र नियंत्रण समझौता है. इस्राएल, भारत और पाकिस्तान ने परमाणु अप्रसार संधि पर कभी भी हस्ताक्षर नहीं किये
है, तथा उत्तर कोरिया 2003 में संधि से
हट गया था.
यह संधि पांच परमाणु हथियार राष्ट्रों (संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, और चीन) को वचनबद्ध करती हैं –
यह संधि पांच परमाणु हथियार राष्ट्रों (संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, और चीन) को वचनबद्ध करती हैं –
• परमाणु हथियारों स्थानांतरण नहीं करेंगे
• अन्य परमाणु विस्फोटक उपकरण
• गैर परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र को अपनी तकनीकी स्थानांतरण नहीं करेंगे
संधि के तहत, गैर परमाणु हथियार अधिग्रहण या परमाणु हथियार या परमाणु विस्फोटक उपकरणों का उत्पादन करने का कार्य नहीं करेंगे. परमाणु अप्रसार संधि की समीक्षा परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से की गयी हैं.
• अन्य परमाणु विस्फोटक उपकरण
• गैर परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र को अपनी तकनीकी स्थानांतरण नहीं करेंगे
संधि के तहत, गैर परमाणु हथियार अधिग्रहण या परमाणु हथियार या परमाणु विस्फोटक उपकरणों का उत्पादन करने का कार्य नहीं करेंगे. परमाणु अप्रसार संधि की समीक्षा परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से की गयी हैं.
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