जोहांसबर्ग शहर प्रशासन ने 1 मई,
2014 को पूजा की जगह के लिये एक पूर्ण गुरुद्वारा के निर्माण की
अनुमति प्रदान की. इस अनुमति के बाद, यह गुरुद्वारा
जोहानसबर्ग का प्रथम गुरुद्वारा होगा. यह गुरुद्वारा अफ्रीका में जन्मे सिख
व्यापारी हरबिंदर सिंह सेठी द्वारा दान दी गयी भूमि पर बनाया जाएगा.
यह निर्णय यहां के एक जोहांसबर्ग में रह रहे श्वेत दक्षिण अफ्रीकियों
के साथ आठ साल की लड़ाई लड़ने के बाद आया. दोनों पक्षों की मांग और लड़ाई के कारण
व ‘द पार्कमोर रेजीडेंट एसोसिएशन’ के
शहर में गुरुद्वारा निर्माण पर आपत्ति के कारण अब तक गुरुद्वारा अस्थाई तौर पर चल
रहा था. पार्कमोर समुदाय ने आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया था कि सेठी ने शुरू में
कहा था कि वह इस भूमि पर एक मकान बनाएंगे लेकिन फिर पूजा स्थल के लिए उन्होंने
इसका उपयोग किया.
शहर के इस समझौते के साथ, 15 लाख रैंड की लागत से गुरुद्वारा साहिब का निर्माण अगले दो महीने के भीतर
शुरू होगा.
पृष्ठभूमि
रोकने या दूर रहने की यह प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के कई
क्षेत्रों में अस्तित्व में है जैसा कि पहले काफी लम्बे समय तक कुछ क्षेत्र केवल
श्वेत समुदाय द्वारा आरक्षित थे, 1994 में प्रथम
लोकतांत्रिक चुनाव के बाद, भारतीय दक्षिण अफ्रीका के इन
क्षेत्रों में रहना शुरू कर दिया और वहां मस्जिदों और मंदिरों का निर्माण करने का
प्रयास किया.
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