फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) की केंद्रीय परिषद ने 27 अप्रैल 2014 को अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सदस्यता के
लिए एक नई प्रणाली अपनायी. पीएलओ ने फैसला किया है कि वे फिलिस्तीन के राज्य का
दर्जा के लिए वे 63 अंतरराष्ट्रीय यूएन कंवेशन पर हस्ताक्षर
करने के लिए बोली लगाएंगे.
इसके अलावा, पीएलओ ने
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा से स्टेलमेंट कंस्ट्रक्शन, जेरुसलेम में फिलिस्तीन विरोधी गतिविधियों और चर्चों एवं मस्जिदों को
नुकसान पहुंचाने खासकर जेरुसलेम के हरम अल– शरीफ/ टेंपल
माउंट को नुकसान पहुंचाने के लिए इस्राइल की निंदा करने के बाबत भी पूछा.
कुल 120 सदस्यों वाली
केंद्रीय परिषद ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू की फिलिस्तीन द्वारा इस्राइल को
यहूदियों का राष्ट्र मानने की मांग को भी पूरी तरह अस्वीकृति करने की पुष्टि कर
दी.
हालांकि, परिषद ने
अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों के आधार पर इस्राइल के साथ वार्ता शुरु करने के विकल्प
खुले होने की बात भी कही.
विश्लेषण
साल 2013 में भारी मतों से
संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षक राज्य का सदस्य बना था फिलिस्तीन. नवंबर
2013 में फिलिस्तीन ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा में वोट
डाला और विश्विक इकाइ के तौर पर उसे पूर्ण मान्यता हासिल हुई.
कुल 193 सदस्यों वाले
महासभा में से ज्यादातर सदस्यों ने फिलिस्तीन के राजदूत रियाद मंसूर की पूर्व
युगोस्लाविया के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल ट्राइबूनल के जज के लिए मतदान करने पर
उनकी सराहना की थी. फिलिस्तीन का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों पर वोट करना
नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत वोट करना था और वह एवं अन्य जैसे
वैटिकन अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में जजों की नियुक्ति के लिए वोट कर सकते हैं.
इस्राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने फिलिस्तिनों की
संयुक्त राष्ट्र में मान्यता के खिलाफ जोरदार पैरवी की थी. उनका तर्क था कि अलग
राज्य सिर्फ दशकों पुराने इस्राइल– फिलिस्तीन
संघर्ष को प्रत्यक्ष द्विपक्षीय वार्ता के जरिए समाप्त कर ही हासिल किया जा सकता
है.
इस्राइल ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि
फिलिस्तीनी अथॉरिटी राज्य नहीं हैं और वे राज्य का दर्जा के लिए मानदंडों को भी
पूरा करने में विफल रहे हैं.
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