सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता
वाली चार न्यायाधीशों की पीठ ने दिल्ली में 1993 के बम
विस्फोटों के अभियुक्त देवेन्दर पाल सिंह भुल्लर की मौत की सजा को आजीवन कारावास
में बदल दिया. इसका कारण केंद्र सरकार द्वारा उसकी दया याचिका पर फैसला करने में
देरी और वर्तमान में देवेन्दर पाल सिंह भुल्लर का स्वास्थ्य ठीक न होना रहा.
पीठ ने यह निर्णय 31 मार्च 2014 को सुनाया.
देवेन्दर पाल सिंह भुल्लर के अधिवक्ता ने अनुरोध किया था कि
अभियुक्त दिमागी तौर पर फिट नहीं है और इसलिए उसे फांसी नहीं दी जानी चाहिए. जिस
पर सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी 2014 में देवेन्दर पाल सिंह
भुल्लर की मौत की सजा रोक दी थी और उसके मानसिक स्वास्थ्य की चिकित्सा रिपोर्ट
मांगी थी.
विदित हो कि देवेन्दर पाल सिंह भुल्लर को 1993 के दिल्ली बम विस्फोट में दोषी पाया गया था, जिसमें
नौ लोग मारे गये थे. उसने जनवरी 2003 में राष्ट्रपति से दया
याचना की थी. आठ वर्ष बाद उसकी यह दया याचिका अस्वीकार कर दी गई.
देवेन्दर पाल सिंह भुल्लर के अधिवक्ता ने अनुरोध किया था कि अभियुक्त दिमागी तौर पर फिट नहीं है और इसलिए उसे फांसी नहीं दी जानी चाहिए. जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी 2014 में देवेन्दर पाल सिंह भुल्लर की मौत की सजा रोक दी थी और उसके मानसिक स्वास्थ्य की चिकित्सा रिपोर्ट मांगी थी.
विदित हो कि देवेन्दर पाल सिंह भुल्लर को 1993 के दिल्ली बम विस्फोट में दोषी पाया गया था, जिसमें नौ लोग मारे गये थे. उसने जनवरी 2003 में राष्ट्रपति से दया याचना की थी. आठ वर्ष बाद उसकी यह दया याचिका अस्वीकार कर दी गई.
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