केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 फरवरी 2014 को न्यूनतम
बदलावों के साथ तेलंगाना विधेयक को मंजूरी प्रदान की और तय किया कि हैदराबाद को
संघशासित क्षेत्र का दर्जा नहीं दिया जाएगा. अभी तक सीमांध्र के नेताओं की मांगों
में हैदराबाद को संघशासित क्षेत्र का दर्जा दिए जाने की माँग शामिल थी. तेलंगाना
बिल को स्वीकार किए जाने से उसे संसद में प्रस्तुत किए जाने का रास्ता साफ हो गया
है.
अब बिल भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को उनकी स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा और उसके बाद 12 फरवरी 2014 को उसे वर्तमान रूप में राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाएगा तथा सरकार उसमें 32 संशोधन पेश करेगी. रखेगी. संशोधनों में राज्य के विभाजन के कुछ प्रशासनिक पहलू शामिल हैं.
आंध्र प्रदेश विधानमंडल द्वारा अपने दोनों सदनों में चर्चा के बाद वापस भेजे गए बिल को नई दिल्ली में आयोजित विशेष बैठक में स्वीकृति मिली. मंत्रीमंडल ने हैदराबाद को संघशासित क्षेत्र बनाने की सीमांध्र क्षेत्र की माँग न मानने का भी फैसला किया. जैसा कि पहले तय किया गया था, हैदराबाद अधिकतम दस वर्ष की अवधि के लिए दोनों प्रदेशों की संयुक्त राजधानी रहेगा, जिसके बाद वह तेलंगाना का हो जाएगा. इसके अतिरिक्त, मंत्रिमंडल द्वारा रायल तेलंगाना के प्रस्ताव पर भी विचार नहीं किया गया.
अब बिल भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को उनकी स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा और उसके बाद 12 फरवरी 2014 को उसे वर्तमान रूप में राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाएगा तथा सरकार उसमें 32 संशोधन पेश करेगी. रखेगी. संशोधनों में राज्य के विभाजन के कुछ प्रशासनिक पहलू शामिल हैं.
आंध्र प्रदेश विधानमंडल द्वारा अपने दोनों सदनों में चर्चा के बाद वापस भेजे गए बिल को नई दिल्ली में आयोजित विशेष बैठक में स्वीकृति मिली. मंत्रीमंडल ने हैदराबाद को संघशासित क्षेत्र बनाने की सीमांध्र क्षेत्र की माँग न मानने का भी फैसला किया. जैसा कि पहले तय किया गया था, हैदराबाद अधिकतम दस वर्ष की अवधि के लिए दोनों प्रदेशों की संयुक्त राजधानी रहेगा, जिसके बाद वह तेलंगाना का हो जाएगा. इसके अतिरिक्त, मंत्रिमंडल द्वारा रायल तेलंगाना के प्रस्ताव पर भी विचार नहीं किया गया.
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