वर्ष 2002 में गोधरा कांड
के बाद गुजरात में भड़के दंगों की जांच कर रहे नानावती आयोग के कार्यकाल को गुजरात
सरकार ने छह महीने का एक और विस्तार दिया. आयोग को 21वीं बार
विस्तार दिया गया. विस्तार दिए जाने के बाद इसका कार्यकाल अब 30 जून 2014 तक होगा. इसके पहले जून 2013 में गुजरात सरकार ने 31 दिसम्बर 2013 तक आयोग का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ाया था.
इस आयोग में सेवानिवृत्त न्यायाधीश जीटी नानवती एवं अक्षय मेहता हैं.
आयोग के सचिव जीसी पटेल है. जीटी नानवती इससे पूर्व वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच आयोग के अध्यक्ष रह चुके है.
गोधरा कांड के जांच के लिए नियुक्त नानावती आयोग से संबंधित तथ्य
• गुजरात सरकार ने 3 मार्च, 2002 को रिटायर्ड जस्टिस केजी शाह की अध्यक्षता में इस आयोग का गठन किया था.
• मई, 2002 में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश गिरीश थाकोरलाल(जीटी) नानावती को इसका अध्यक्ष बनाया गया.
• वर्ष 2008 में जस्टिस शाह की मौत के बाद जस्टिस अक्षय मेहता को इसका सदस्य बनाया गया था.
• नानावती आयोग ने वर्ष 2008 में रिपोर्ट का एक भाग गुजरात सरकार को सौंपा, जिसमें गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में लगी आग को सुनियोजित साजिश बताया गया.
इस आयोग में सेवानिवृत्त न्यायाधीश जीटी नानवती एवं अक्षय मेहता हैं.
आयोग के सचिव जीसी पटेल है. जीटी नानवती इससे पूर्व वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच आयोग के अध्यक्ष रह चुके है.
गोधरा कांड के जांच के लिए नियुक्त नानावती आयोग से संबंधित तथ्य
• गुजरात सरकार ने 3 मार्च, 2002 को रिटायर्ड जस्टिस केजी शाह की अध्यक्षता में इस आयोग का गठन किया था.
• मई, 2002 में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश गिरीश थाकोरलाल(जीटी) नानावती को इसका अध्यक्ष बनाया गया.
• वर्ष 2008 में जस्टिस शाह की मौत के बाद जस्टिस अक्षय मेहता को इसका सदस्य बनाया गया था.
• नानावती आयोग ने वर्ष 2008 में रिपोर्ट का एक भाग गुजरात सरकार को सौंपा, जिसमें गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में लगी आग को सुनियोजित साजिश बताया गया.
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