भारतीय मूल की शिक्षाविद आशा
खेमका को ब्रिटेन के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार डेम कमांडर ऑफ द आर्डर ऑफ द ब्रिटिश
एम्पायर से सम्मानित किया गया. इसके साथ ही 83 वर्षीय
आशा खेमका अपने समुदाय से यह सम्मान प्राप्त करने वाली प्रथम व्यक्ति बन गई. यह
ब्रिटिश साम्राज्य के महिला नाइटहुड सम्मान के बराबर है. वर्ष 2008 में आशा खेमका को आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर से सम्मानित किया जा चुका
है.
उन्हें यह सम्मान पिछले आठ वर्ष से वेस्ट नोटिंघमशायर कॉलेज में बतौर प्राचार्य वेस्ट मिडलैंड के पिछड़े इलाके में सेवाएं देने को लेकर सम्मानित किया गया. महारानी के वार्षिक नववर्ष सम्मान की सूची में आशा खेमका को डेम कमांडर ऑफ द आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर से सम्मानित किया गया. यह सूची 31 दिसंबर 2014 को जारी की गई. इसमें 15 लोग भारतीय मूल के हैं. 1,195 लोगों को इस साल इस सम्मान के लिए चुना गया जिनमें 610 महिलाएं हैं.
डेम कमांडर ऑफ द आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर से संबंधित तथ्य
• यह ब्रिटेन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. इसकी स्थापना किंग जॉर्ज पंचम ने 4 जून 1917 को की.
• यह सम्मान नागरिक एवं सैन्य डिवीजनों के पाँच वर्गों से मिलकर बने सम्मानों में से एक है.
• यह सम्मान ब्रिटिश नागरिकों या किसी ऐसे व्यक्ति को जो ब्रिटेन के लिए एक प्रभाव बनाता है, उसे प्रदान किया जाता है.
• यह सम्मान महिलायों को डेम कमांडर ऑफ द आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर के नाम से दिया जाता है, वही पुरुषों को यह सम्मान नाइट कमांडर ऑफ द आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर के नाम से दिया जाता है.
आशा खेमका से सम्बंधित मुख्य तथ्य
• उनका जन्म बिहार के सीतामढ़ी जिले में हुआ था.
• वह अपने देश में भी कौशल विकास कार्य में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं.
• वर्ष 1931 में धार एस्टेट की महारानी लक्ष्मी देवी बाई साहिबा के बाद तीन बच्चों की भारतीय मूल की मां आशा को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
• आशा की शादी महज 15 साल की उम्र में हो गई थी.
• वह 1975 में अपने पति और तीन बच्चों के साथ 25 वर्ष की उम्र में ब्रिटेन आई.
• उन्होंने कोई औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की थी, पर उन्होंने सांस्कृतिक और भाषाई बाधाओं को पार किया. 1980 के दशक में आशा ने खुद को सुशिक्षित बनाने की कवायद शुरू की.
• उन्होंने बच्चों के टीवी शो देखकर और युवा माताओं से बात कर अंग्रेजी सीखी.
उन्हें यह सम्मान पिछले आठ वर्ष से वेस्ट नोटिंघमशायर कॉलेज में बतौर प्राचार्य वेस्ट मिडलैंड के पिछड़े इलाके में सेवाएं देने को लेकर सम्मानित किया गया. महारानी के वार्षिक नववर्ष सम्मान की सूची में आशा खेमका को डेम कमांडर ऑफ द आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर से सम्मानित किया गया. यह सूची 31 दिसंबर 2014 को जारी की गई. इसमें 15 लोग भारतीय मूल के हैं. 1,195 लोगों को इस साल इस सम्मान के लिए चुना गया जिनमें 610 महिलाएं हैं.
डेम कमांडर ऑफ द आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर से संबंधित तथ्य
• यह ब्रिटेन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. इसकी स्थापना किंग जॉर्ज पंचम ने 4 जून 1917 को की.
• यह सम्मान नागरिक एवं सैन्य डिवीजनों के पाँच वर्गों से मिलकर बने सम्मानों में से एक है.
• यह सम्मान ब्रिटिश नागरिकों या किसी ऐसे व्यक्ति को जो ब्रिटेन के लिए एक प्रभाव बनाता है, उसे प्रदान किया जाता है.
• यह सम्मान महिलायों को डेम कमांडर ऑफ द आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर के नाम से दिया जाता है, वही पुरुषों को यह सम्मान नाइट कमांडर ऑफ द आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर के नाम से दिया जाता है.
आशा खेमका से सम्बंधित मुख्य तथ्य
• उनका जन्म बिहार के सीतामढ़ी जिले में हुआ था.
• वह अपने देश में भी कौशल विकास कार्य में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं.
• वर्ष 1931 में धार एस्टेट की महारानी लक्ष्मी देवी बाई साहिबा के बाद तीन बच्चों की भारतीय मूल की मां आशा को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
• आशा की शादी महज 15 साल की उम्र में हो गई थी.
• वह 1975 में अपने पति और तीन बच्चों के साथ 25 वर्ष की उम्र में ब्रिटेन आई.
• उन्होंने कोई औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की थी, पर उन्होंने सांस्कृतिक और भाषाई बाधाओं को पार किया. 1980 के दशक में आशा ने खुद को सुशिक्षित बनाने की कवायद शुरू की.
• उन्होंने बच्चों के टीवी शो देखकर और युवा माताओं से बात कर अंग्रेजी सीखी.
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