टाटा केमिकल्स ने 11 अगस्त 2016 को अपना यूरिया कारोबार नार्वे के यारा समूह की भारतीय इकाई यारा फर्टिलाइजर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को बिक्री करने की घोषणा की. यह इकाई 2,670 करोड़ रुपए में बिक्री की गयी है.
दोनों कंपनियों के बीच किए गए समझौते के तहत टाटा केमिकल्स कंपनी उत्तर प्रदेश के बबराला में 12 लाख टन क्षमता वाले उर्वरक संयंत्र का कारोबार बेचेगी.
समझौते के बारे में-
समझौते के बारे में-
- यूरिया कारोबार को बेचने के बाद टाटा केमिकल्स टाटा साल्ट (नमक), दाल तथा मसाला संपन्न ब्रांड के तहत बेचे जाने वाले तथा वाटर प्यूरिफायर टाटा स्वच्छ जैसे अपने उपभोक्ता सामग्री के कारोबार पर ध्यान देगी.
- नियामकी मंजूरियां मिलने पर यह सौदा नौ से 12 महीनों में परवान चढ़ सकता है.
- नार्वे की यारा अधिग्रहण हेतु आंतरिक संसाधनों से धन जुटाएगी.
- टाटा केमिकल्स के अनुसार कंपनी के निदेशक मंडल ने बैठक में इससे सम्बंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी.
- निदेशक मंडल ने बबराला में स्थित कंपनी के संयंत्र में विनिर्मित किए जाने वाले यूरिया और ग्राहकों की जरूरत के अनुसार तैयार किए जाने वाले अन्य उर्वरकों की बिक्री और वितरण के कारोबार को सम्मिलित रूप से बिक्री के आधार पर यारा फर्टिलाइजर्स इंडिया को हस्तांतरण करने हेतु निदेशकों की समिति के साथ साथ आडिट समिति के सुझावों का मान लिया है.
- सौदे के तहत कंपनी का यूरिया कारोबार, उसकी परिसंपत्ति, देनदारी, अनुबंध, विलेख आदि यारा इंडिया को हस्तांतरित किए जाएंगे.
- टाटा केमिकल्स के अनुसार टाटा केमिकल्स द्वारा यूरिया कारोबार के विनिवेश से कंपनी का मूल्य बढेगा और इसकी बैलेस-शीट मजबूत होगी.
- साथ ही इसकी वृद्धि की संभावना बेहतर करने में मदद मिलेगी.
- टाटा केमिकल्स के प्रबंध निदेशक आर मुकुन्दन के अनुसार यह उपभोक्ता कारोबार को आगे बढ़ाने के कंपनी की रणनीति के अनुरूप है. अकार्बनिक कंपनी अब रसायन कारोबार में अपनी मजबूत स्थिति को बनाए रखेंगे और रैलिस तथा मेथाहेलिक्स के जरिए कृषि कारोबार पर ध्यान देने की कोशिश करेंगे.
- इस सौदे के लिए हाई कोर्ट और राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की अनुमति आवश्यक है.
बबराला प्लांट के बारे में-
- बबराला प्लांट का टर्नओवर 2,300 करोड़ रु. है.
- इसमें लगभग 1994 में 21 वर्ष पहले टाटा केमिकल्स ने उत्पादन शुरू किया था.
- बबराला प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 5.5 लाख टन अमोनिया और 8.6 लाख टन यूरिया की है.
- यह निजी क्षेत्र के कुल यूरिया उत्पादन क्षमता का 12 प्रतिशत है.
- पिछले वित्त वर्ष में प्लांट से करीब 2,300 करोड़ का कारोबार हुआ था.
- इसे सबसे कम ऊर्जा खपत वाले प्लांटों में गिना जाता है.
टाटा केमिकल्स के बारे में-
- टाटा केमिकल्स (टीसीएल) दुनिया में सोडा ऐश की दूसरी सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी है. ब्रांडेड तथा आयोडाइज्ड नमक सेग्मेंट तथा साथ ही यूरिया तथा फॉस्फेटिक उर्वरकों के खंड में यह भारतीय बाजार की अग्रणी कंपनी है.
- इसकी स्थापना भारत के गुजरात प्रांत के मीठापुर में 1939 में हुई.
- पिछले कुछ वर्षों में इसने वैश्विक सोडा ऐश कारोबार में निवेश कर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है.
- इसने यूके स्थित ब्रूनर मॉन्ड ग्रुप तथा अमेरिकी कंपनी, जेनरल केमिकल इंस्डस्ट्रियन प्रॉडक्ट्स इंक को अधिग्रहित किया, जिससे यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सोडा ऐश निर्माता कंपनी बन चुकी है.
- टाटा केमिकल्स का वित्तीय वर्ष 16-17 की पहली तिमाही का कर पश्चात लाभ 21 प्रतिशत बढ़ कर रु.203 करोड़ हो गया.
- टाटा नमक का 'नमक के वास्ते' अभियान ने रियो ओलंपिक 2016 के लिए जाने वाले भारतीय एथलीटों का समर्थन किया.
नार्वे की यारा फर्टिलाइजर्स इंडिया-
- यारा फर्टिलाइजर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नॉर्वे के 73,000 करोड़ रु. के यारा समूह की भारतीय इकाई है.
- इसका ऑफिस पुणे में है.
- यारा समूह यूरिया कारोबार में विशेषज्ञ है.
- यारा इंडिया अभी उवर्रक का आयात और उनकी बिक्री करती है.
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