बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिकों ने आम से शराब (मैंगो वाइन) बनाने में सफलता प्राप्त की. इसकी जानकारी अगस्त 2016 में बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान ने दी.
मैंगो वाइन बनाने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, मैंगो वाइन को विशेष तकनीक से बनाया गया है, जिसमें कैंसर और हृदय रोग में भी राहत देने की क्षमता होगी तथा सामान्य शराब से इसमें करीब चार प्रतिशत अल्कोहल की मात्र कम रहेगी.
मैंगो वाइन को कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू के खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र स्थित लैब में तैयार किया गया है. इस केंद्र समन्वयक के नेतृत्व में डॉ. अभिषेक दत्त त्रिपाठी ने पूर्व छात्र विकास पटेल की मदद से यह कार्य किया है. फिलहाल इसको लैब स्केल स्तर पर आजमाया गया है. इसके कल्चर इम्पेक चंडीगढ़ से मंगाए गए थे.
मैंगो वाइन के लिए आम की छह किस्मों को शामिल किया गया. आम के गूदे को निकालकर उसमें टोटल सोल्यूबुल सॉलिड मिलाया गया. इसका जूस बनाया गया. उसे 18 डिग्री सेल्सियस पर रखा गया. इसके बाद एक लीटर जूस में दो लीटर पानी डालकर इसको 20 डिग्री सेल्सियस ब्रिक्स पर मेंटेन किया गया. इसके बाद इसमें कल्चर डाला गया. इसको ढककर बायोरियेक्टर मशीन में 25 से 28 डिग्री पर रखा गया. इसके बाद 14 दिनों में मैंगो वाइन तैयार कर फिल्टर किया गया. इस वाइन में नौ से 12 फीसद तक अल्कोहल है.
विशेषज्ञों के अनुसार, एचपीएलसी यानी हाइपर फारमेंस लिक्विड क्रोमेटोग्राफी जांच से पाया गया कि इसमें प्रचुर मात्र में एंटी ऑक्सीडेंट एवं फ्लेबेनाइड जैसे कैटकॉल, गैलोइल ए टाइप, पोलीफेनॉल्स हैं, जो हृदय रोग एवं कैंसर जैसी बीमारियों की रोकथाम में भी कारगर सिद्ध होंगे. इसमें त्वचा संबंधी रोगों को ठीक करने की भी क्षमता है.
0 comments:
Post a Comment