संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने देश में साइबर सुरक्षा के लिए 9 फरवरी 2016 को एक राष्ट्रीय कार्य योजना प्रस्तुत की.
अमेरिका के राष्ट्रपति के खुफिया विभाग की ओर से नई तकनीकों के बढ़ते खतरों की चेतावनी दिए जाने के बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा ने साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक राष्ट्रीय कार्य योजना प्रस्तुत की.
इस कार्ययोजना को सुरक्षित इंटरनेट दिवस के उपलक्ष्य में जारी किया गया.
अमेरिका के राष्ट्रपति के खुफिया विभाग की ओर से नई तकनीकों के बढ़ते खतरों की चेतावनी दिए जाने के बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा ने साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक राष्ट्रीय कार्य योजना प्रस्तुत की.
इस कार्ययोजना को सुरक्षित इंटरनेट दिवस के उपलक्ष्य में जारी किया गया.
राष्ट्रीय कार्य योजना के प्रमुख बिंदु
• बजट के अनुरोध में साइबर सुरक्षा के प्रयासों के लिए 19 अरब डॉलर की मांग की है. यह राशि मौजूदा स्तर से 35 प्रतिशत ज्यादा है.
• इस राशि में से की तीन अरब डॉलर की रकम सरकारी एजेंसियों में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटरों की सुरक्षा में मदद के लिए रखी गई है.
• बजट में दिए गये फण्ड की बदौलत पुराने सिस्टम को बदलकर नए एवं सुरक्षित सिस्टम की स्थापना की जाएगी.
• ओबामा सरकार द्वारा यह कदम पिछले कुछ वर्षों में सरकारी एवं प्राइवेट सेक्टर में होने वाले साइबर अटैक के बाद उठाया गया. वर्ष 2015 में साइबर सिक्योरिटी बिल भी पारित किया गया जिसका उद्देश्य देश में बेहतर साइबर व्यवस्था प्रदान करना है.
• राष्ट्रीय साइबर सिक्योरिटी अभियान चलाया जायेगा, जिसमें पासवर्ड के अतिरिक्त सुरक्षा के अन्य आयाम भी जोड़े जायेंगे.
• इस अभियान में विभिन्न फर्मों जैसे गूगल, फेसबुक, ड्रॉपबॉक्स एवं माइक्रोसॉफ्ट को शामिल किया जाएगा तथा फाइनेंसियल सेवाएं देने वाली कंपनियां जैसे मास्टरकार्ड, वीज़ा एवं पेपाल को भी इसमें शामिल किया जायेगा.
पृष्ठभूमि
यह कार्य योजना वर्ष 2015 में हुए एक वृहद सुरक्षा चूक मामले के बाद तैयार की गयी जिसमें लगभग 20 मिलियन सरकारी कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी लीक हो गयी थी.
हालांकि देश में वर्ष 1960 से सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन स्थापित किया गया है लेकिन यह वर्तमान में देश के लिए लाभकारी नहीं है एवं इससे वांछित उद्देश्यों की पूर्ति नहीं हो पा रही.
अमेरिका खुफिया विभाग के अनुसार चीन, रूस, ईरान एवं उत्तर कोरिया से देश की साइबर सुरक्षा को खतरा हो सकता है.
• बजट के अनुरोध में साइबर सुरक्षा के प्रयासों के लिए 19 अरब डॉलर की मांग की है. यह राशि मौजूदा स्तर से 35 प्रतिशत ज्यादा है.
• इस राशि में से की तीन अरब डॉलर की रकम सरकारी एजेंसियों में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटरों की सुरक्षा में मदद के लिए रखी गई है.
• बजट में दिए गये फण्ड की बदौलत पुराने सिस्टम को बदलकर नए एवं सुरक्षित सिस्टम की स्थापना की जाएगी.
• ओबामा सरकार द्वारा यह कदम पिछले कुछ वर्षों में सरकारी एवं प्राइवेट सेक्टर में होने वाले साइबर अटैक के बाद उठाया गया. वर्ष 2015 में साइबर सिक्योरिटी बिल भी पारित किया गया जिसका उद्देश्य देश में बेहतर साइबर व्यवस्था प्रदान करना है.
• राष्ट्रीय साइबर सिक्योरिटी अभियान चलाया जायेगा, जिसमें पासवर्ड के अतिरिक्त सुरक्षा के अन्य आयाम भी जोड़े जायेंगे.
• इस अभियान में विभिन्न फर्मों जैसे गूगल, फेसबुक, ड्रॉपबॉक्स एवं माइक्रोसॉफ्ट को शामिल किया जाएगा तथा फाइनेंसियल सेवाएं देने वाली कंपनियां जैसे मास्टरकार्ड, वीज़ा एवं पेपाल को भी इसमें शामिल किया जायेगा.
पृष्ठभूमि
यह कार्य योजना वर्ष 2015 में हुए एक वृहद सुरक्षा चूक मामले के बाद तैयार की गयी जिसमें लगभग 20 मिलियन सरकारी कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी लीक हो गयी थी.
हालांकि देश में वर्ष 1960 से सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन स्थापित किया गया है लेकिन यह वर्तमान में देश के लिए लाभकारी नहीं है एवं इससे वांछित उद्देश्यों की पूर्ति नहीं हो पा रही.
अमेरिका खुफिया विभाग के अनुसार चीन, रूस, ईरान एवं उत्तर कोरिया से देश की साइबर सुरक्षा को खतरा हो सकता है.
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