लोकसभा ने 3 दिसम्बर 2015 को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को राष्ट्रीय मानक निकाय बनाने तथा वस्तुओं सेवाओं और प्रणालियों को इसके तहत लाने के उद्देश्य से भारतीय मानक ब्यूरो विधेयक,2015 को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान की.
इस विधेयक के तहत प्रक्रिया को तो आसान बनाया गया है, लेकिन दंड के प्रावधान को मजबूत बनाया गया है.
अब अनिवार्य उत्पादों के मामले में अगर कोई सामान मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में डाला जाएगा. इसके अतिरिक्त जुर्माने की राशि को बढ़ाकर एक लाख रुपए और सजा भी एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष कर दी गई है.
बीआईएस पहले केवल प्रसंस्करण की गुणवत्ता के लिए मानक तैयार करता था, लेकिन अब इसमें सिस्टम और सर्विसेज को भी जोड़ा गया है.
कंपनियां बीआईएस मानक को स्वप्रमाणित करेंगी और शिकायत आने पर ही जांच की जाएगी.
इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सहायता मिलेगी और बाहर से आने वाले घटिया सामान पर रोक लगेगी.
विदित हो मानकों को लेकर पिछला कानून 1986 में बनाया गया था.
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