30 जून 2015 वर्ष के अन्य दिनों से एक सेकंड लंबा होगा.
30 जून 2015 को 23:59:59 में एक सेकेंड अतिरिक्त या लीप सकेंड जुड़ जाएगा. 30 जून 2015 को 23:59:59 में 61वां सेकेंड जुड़ने के बाद 00:00:00 के स्थान पर 23:59:60
देखने को मिलेगा.
नासा के मैरीलैंड के ग्रीनबेल्ट में गोडार्ड स्पेस फ्लाइट
केंद्र के अनुसार, 'पृथ्वी का परिक्रमण धीरे-धीरे धीमा हो
रहा है इसलिए इसमें अतिरिक्त लीप सेकेंड जुड़ गया.' ऐसा
कोऑर्डिनेटेड युनिवर्सल टाइम यानी यूटीसी के मुताबिक है, जिसका
इस्तेमाल लोग दैनिक जीवन में करते हैं.
यूटीसी एटॉमिक टाइम है, जहां एक
सेकेंड की अवधि सीसियम के एटम्स में होने वाले पूर्वानुमानित इलेक्ट्रॉमैग्नेटिक
ट्रांजिशन के आधार पर होती है. ये ट्रांजिशन इतने अधिक विश्वसनीय होते हैं कि
सीसियम क्लॉक 1400000 वर्षों तक सही हो सकती है. नासा के
अनुसार 'पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच
गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से पृथ्वी का घूर्णन धीमा हो रहा है.
कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (यूटीसी) के मुताबिक, एक दिन में 86,400 सेकंड्स होते है. यूटीसी टाइम
स्टैंडर्ड का इस्तेमाल समय देखने के लिए किया जाता है. यूटीसी ‘एटॉमिक टाइम' है, जहां एक
सेकंड की अवधि सीसियम के एटम्स में होने वाली पूर्वानुमानित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक
ट्रांजिशन्स के आधार पर तय की जाती है.
भारत में, वैज्ञानिकों द्वारा द टाइम एंड
फ्रीक्वेंसी स्टैंडर्ड लैबोरेट्री स्थित अटोमिक घड़ियों में 05:29:59 के बाद लीप सेकेंड जोड़ दिया गया. भारतीय मानक
समय (आईएसटी) कोर्डिनेटिड यूनिवर्सल समय (यूटीसी)से 5 घंटा 30
मिनट आगे है. यूटीसी ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) के उन्नत संस्करण
है.
द टाइम एंड फ्रीक्वेंसी स्टैंडर्ड लैबोरेट्री भारत की
आधिकारिक समय निर्धारक है और नई दिल्ली के राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला में स्थित
है.
भारतीय मानक समय (आईएसटी) याम्योत्तर ग्रीनविच से 82.5°
पूर्व है, जिसका अर्थ है कि हमारा मानक समय
ग्रीनविच के मानक समय से साढ़े पाँच घंटे आगे है.
भारत में पूर्वी देशान्तर, जो कि उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के नैनी से गुजरती है, के समय को मानक समय माना गया है.
भारत में पूर्वी देशान्तर, जो कि उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के नैनी से गुजरती है, के समय को मानक समय माना गया है.
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