प्रन्द्त्ल-डी का अर्थ है मंगल ग्रह पर लैंड करने के लिए प्रारंभिक अनुसंधान एयरोडाईनामिक डिज़ाइन तैयार करना, इसे नासा के आर्मस्ट्रांग फ्लाइट रिसर्च सेंटर द्वारा तैयार किया गया है.
यह प्रन्द्त्ल-एम एयरक्राफ्ट का प्रोटोटाइप है, यह वर्ष 2020 से 2024 के बीच मंगल ग्रह पर लॉन्च किया जाने वाला पहला विमान होगा.
प्रन्द्त्ल-एम विमान की मुख्य विशेषताएं
यह मंगल ग्रह के लिए वर्ष 2020 में छोड़े जाने वाले प्रक्षेपण का हिस्सा होगा जो एयरोशेल से अलग हो जायेगा.
यह मंगल ग्रह के वातावरण में उड़ान भरने, नीचे की ओर जाने तथा भविष्य में अंतरिक्ष यात्री मिशन के लिए उपयुक्त होगा.
यह वैज्ञानिकों को उच्च क्वालिटी की फोटो तथा मानचित्र भेजेगा जिससे वे आंकड़े तैयार करने में सक्षम होंगे.
इसकी फ्लाइट टाइम 10 मिनट होगी तथा यह मंगल ग्रह की सतह से 2000 फीट की ऊंचाई पर विचरण कर सकता है तथा इसकी सीमा में 20 मील का क्षेत्र होगा.
मंगल ग्रह पर कार्यरत होने की स्थिति में इसके पंखों का फैलाव 24 इंच होगा जिससे यह 3यू क्यूबसैट में आसानी से फिट हो सकेगा.
मंगल ग्रह के वातावरण में इसका भार एक पाउंड से भी कम होगा. (पृथ्वी पर यह 2.6 पाउंड होगा क्योंकि मंगल ग्रह का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी का 38 प्रतिशत है).
इजेक्शन के समय होने वाली परेशानियों से निपटने के लिए इसे विशेष सामग्री जैसे फाइबर ग्लास, कार्बन फाइबर से तैयार किया जायेगा.
प्रन्द्त्ल-डी विमान वर्ष 2015 एवं 2016 में अनेक उड़ान परीक्षणों से गुजरेगा जिसके परिणामस्वरूप प्रन्द्त्ल-एम विमान का विकास करने में सहायता प्राप्त होगी.
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