31 मार्च 2015 को
राजस्थान सरकार ने जयपुर में महिला दूध बैंक जीवनधारा की शुरुआत की. इसका उद्घाटन
स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र राठौर ने किया. इसका उद्देश्य राजस्थान में उच्च शिशु
मृत्यु दर को रोकना है.
राज्य सरकार ने इस बैंक का शुभारंभ नार्वे की सरकार और जेके लॉन अस्पताल के साथ मिलकर किया है.
यह बैंक स्तनपान कराने वाली माताओं द्वारा दान किए गए दूध को जमा करेगा जिसका इस्तेमाल वंचित शिशुओं के लिए किया जा सकेगा. दान देने की इच्छुक माताओं से मिला यह दूध शिशुओं को मुफ्त में दिया जाएगा. दान देने की प्रक्रिया दाताओं की पूरी जांच और एचआईवी, सिफिल्स, हेपेटाइटिस और अन्य बीमारियों की चिकित्सीय जांच के बाद ही शुरु की जाएगी. इसके बाद दूध को पाश्चुरीकृत किया जाएगा जिसमें करीब तीन माह का वक्त लगता है.
पहला सरकारी महिला दूध बैंक कोलकाता में खोला गया था और जयपुर इस श्रृंखला का दूसरा है. हालांकि राज्य में पहला महिला दूध बैंक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) उदयपुर के एक सरकारी अस्पताल में शुरु किया गया था.
नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) 2012 के अनुसार राजस्थान में शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 जन्म पर 49 फीसदी है और इसकी वजह समय पर माता के दूध की अनुपलब्धता है.
राज्य सरकार ने इस बैंक का शुभारंभ नार्वे की सरकार और जेके लॉन अस्पताल के साथ मिलकर किया है.
यह बैंक स्तनपान कराने वाली माताओं द्वारा दान किए गए दूध को जमा करेगा जिसका इस्तेमाल वंचित शिशुओं के लिए किया जा सकेगा. दान देने की इच्छुक माताओं से मिला यह दूध शिशुओं को मुफ्त में दिया जाएगा. दान देने की प्रक्रिया दाताओं की पूरी जांच और एचआईवी, सिफिल्स, हेपेटाइटिस और अन्य बीमारियों की चिकित्सीय जांच के बाद ही शुरु की जाएगी. इसके बाद दूध को पाश्चुरीकृत किया जाएगा जिसमें करीब तीन माह का वक्त लगता है.
पहला सरकारी महिला दूध बैंक कोलकाता में खोला गया था और जयपुर इस श्रृंखला का दूसरा है. हालांकि राज्य में पहला महिला दूध बैंक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) उदयपुर के एक सरकारी अस्पताल में शुरु किया गया था.
नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) 2012 के अनुसार राजस्थान में शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 जन्म पर 49 फीसदी है और इसकी वजह समय पर माता के दूध की अनुपलब्धता है.
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