गुजरात सरकार ने वर्ष 2015 के लिए नई
औद्योगिक नीति की घोषणा 1 जनवरी 2015 को
की. नीति की घोषणा मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने की.
औद्योगिक नीति का उद्देश्य राज्य को वैश्विक विनिर्माण का
हब बना कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया सपने को हकीकत में बदलने
में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है.
वर्ष 2015 के लिए नई
औद्योगिक नीति की मुख्य बातें
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नीति का उद्देश्य व्यापार के अनुकूल
माहौल तैयार करना और लोगों को स्टार्ट–अप्स के लिए
प्रोत्साहित करना है ताकि वे नौकरी की तलाश भर करने की बजाए खुद का व्यापार शुरु
कर सकें.
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यह गुजरात के 15 से 59 वर्ष के बीच आयु समूह की आबादी के करीब 60
फीसदी को अवसर मुहैया कराएगा.
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नीति बुनियादी ढांचे का विकास, श्रम कानून का सरलीकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिए नवाचार को
प्रोत्साहित करने जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस करेगा.
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इसके अलावा, यह युवाओं, महिलाओं, अनुसूचित
जातियों, अनुसूचित जनजातियों और विकलांग उद्यमियों के
प्रोत्साहन पर भी ध्यान देगा.
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यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में सहायता करने के साथ
प्रौद्योगिकी अद्यतन में मदद करेगा.
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यह क्लीन एंड ग्रीन एनर्जी के प्रयोग
को प्रोत्साहित कर प्रदूषण करन करने पर फोकस करने के साथ– साथ शून्य–प्रवाह निर्वहन संयंत्रों (जीरो– एफ्यूलेंट डिस्चार्ज प्लांट्स) की स्थापना करेगा.
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यह नीति कपड़ा, परिधान, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों
में नए कारोबार की स्थापना के लिए विशेष प्रोत्साहन भी प्रदान करता है.
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यह मौजूदा संसाधनों में मूल्य
संवर्धन को बढ़ावा देना चाहता है जो नई नौकरियां पैदा करेगा और ऑटो के कल– पुर्जे, इंजीनियरिंग, ड्रग्स,
सीमेंट और रसायन जैसे उद्योगों जो पहले से ही राज्य में फल– फूल रहे हैं, में आयात को कम करेगा.
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