इराक
का अनबर 2 नवंबर 2014 को
सुर्खियों में छाया रहा. यहां आईएसआईएस समूह के आतंकवादियों ने इराक के अल–
बू नीमर जनजाति के 322 लोगों की नृशंस हत्या
कर दी. मारे गए लोगों में दर्जनों महिलाएं एवं बच्चे शामिल थे, जिनके पार्थिव शरीर को कुएं में फेंक दिया गया. इस नरसंहार को आईएसआईएस
द्वारा अल–बू निमर जनजाति के जायूयत अल-बू नीमर नाम के गांव
पर कब्जा करने के बाद अंजाम दिया गया.
अल–बू निमर जनजाति सुन्नी कबीले हैं, जो आईएसआईएस के
खिलाफ लड़ रहे थे और इंधन एवं गोला– बारूद न होने के बावजूद,
उन्होंने इस समूह को कई हफ्तों से पश्चिमी अनबर प्रांत से अलग बनाए
रखा था.
जून 2014
में आईएसआईएस समूह द्वारा उत्तरी इलाके पर कब्जा किए जाने के बाद से
इस नरसंहार को सबसे बुरा खूनी नरसंहार बताया जा रहा है. इस नरसंहार के पीछे इराक
और सीरिया में मध्यकालीन खिलाफत की स्थापना का मकसद था.
गांव
के इस पतन के बाद शिया नीत राष्ट्रीय सरकार ने उम्मीद जताई है कि अल–बू नीमर जनजाती एक बार फिर से सशक्त बल के तौर पर उभरेंगे और इराक की सेना
को आईएसआईएस से निपटने में मदद करेंगे.
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