भारत ने जमीन– से– जमीन पर मार
करने वाली परमाणु-क्षमता संपन्न धनुष बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण नौसैनिक जहाज से
ओडीशा के तट पर 14 नवंबर 2014 को किया.
धनुष भारत का स्वदेशी विकसित पृथ्वी मिसाइल का नौसेना संस्करण है जिसे एक जहाज से
बंगाल की खाड़ी में रक्षा बल के सामरिक बल कमांड (स्ट्रैटेजित फोर्स कमांड–
एसएफसी) द्वारा दागा गया.
मिसाइल का प्रक्षेपण सैन्य बलों के अभ्यास का एक हिस्सा था और यह
बहुत सटीकता के साथ अपने निर्धारित लक्ष्य पर पहुंचा. मिसाइल के प्रक्षेपण और
उड़ान प्रदर्शन पर ओडीशा के चांदीपुर के आईटीआर से नजर रखी गई थी.
धनुष मिसाइल से संबंधित मुख्य तथ्य
• धनुष मिसाइल परंपरागत विस्फोटकों के साथ– साथ 500 से 1000 किलोग्राम तक के परमाणु विस्फोटकों को ले जाने में सक्षम है औऱ यह जमीन और समुद्र दोनों ही लक्ष्यों को भेद सकता है.
• एकल– चरण, तरल– स्वचालित धनुष सैन्य सेवाओं में पहले ही शामिल किया जा चुका है. यह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (इंटिग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम– आईजीएमडीपी) के तहत विकसित पांच मिसाइलों में से एक है.
• यह भारतीय नौसेना के लिए विकसित किया गया है और इसका इस्तेमाल जहाज–रोधी हथियार के तौर पर किया जा सकता है. यह अपनी रेंज के भीतर बड़े से बड़े लक्ष्यों को तबाह कर सकता है.
• यह मिसाइल भारतीय नौसेना को बेहद सटीकता से दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में सक्षम बनाता है.
इससे पहले 14 नवंबर 2014 को, 350 किलोमीटर की रेंज वाली जमीन– से– जमीन पर मार करने वाले पृथ्वी– II मिसाइल का परीक्षण चांदीपुर परीक्षण रेंज से किया गया था.
एकीकृत परीक्षण रेंज (इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज– आईटीआर) के निदेशक– एमवीकेवी प्रसाद
धनुष मिसाइल से संबंधित मुख्य तथ्य
• धनुष मिसाइल परंपरागत विस्फोटकों के साथ– साथ 500 से 1000 किलोग्राम तक के परमाणु विस्फोटकों को ले जाने में सक्षम है औऱ यह जमीन और समुद्र दोनों ही लक्ष्यों को भेद सकता है.
• एकल– चरण, तरल– स्वचालित धनुष सैन्य सेवाओं में पहले ही शामिल किया जा चुका है. यह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (इंटिग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम– आईजीएमडीपी) के तहत विकसित पांच मिसाइलों में से एक है.
• यह भारतीय नौसेना के लिए विकसित किया गया है और इसका इस्तेमाल जहाज–रोधी हथियार के तौर पर किया जा सकता है. यह अपनी रेंज के भीतर बड़े से बड़े लक्ष्यों को तबाह कर सकता है.
• यह मिसाइल भारतीय नौसेना को बेहद सटीकता से दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में सक्षम बनाता है.
इससे पहले 14 नवंबर 2014 को, 350 किलोमीटर की रेंज वाली जमीन– से– जमीन पर मार करने वाले पृथ्वी– II मिसाइल का परीक्षण चांदीपुर परीक्षण रेंज से किया गया था.
एकीकृत परीक्षण रेंज (इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज– आईटीआर) के निदेशक– एमवीकेवी प्रसाद
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