केंद्र सरकार ने लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम,
2013 में संशोधन की घोषणा 30 अक्टूबर 2014
को की और लोकपाल चयन पैनल में नेता विपक्ष को शामिल कर लिया. इससे
संबंधित विधेयक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा. विधेयक में
लोकपाल अधिनियम की धारा 4(1)(c) में संशोधन किया जाएगा.
इसमें एक खंड के लिए स्पष्टीकरण जोड़ा जाएगा जिसमें यह कहा गया होगा
कि लोकसभा में अगर कोई भी नेता विपक्ष नहीं है तो विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी का
नेता चयन पैनल का प्रतिनिधित्व कर सकता है.
लोकपाल की नियुक्ति में विपक्ष को शामिल करने का फैसला, ऐसे में तब जब लोकसभा में कोई भी मान्यता प्राप्त नेता विपक्ष नहीं है,
केंद्रीय सतर्कता अधिनियम, 2003 और सूचना के
अधिकार अधिनियम, 2005 के ऐसे ही प्रावधानों के तहत किया गया.
सीवीसी अधिनियम और आरटीआई अधिनियम के प्रावधान के तहत
दो अधिनियमों के तहत, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) और सर्तकर्ता आयुक्तों एवं केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) एवं सूचना आयुक्तों की नियुक्ति उच्च–स्तरीय समिति, जिसमें लोकसभा का नेता विपक्ष भी उसका हिस्सा हो, की सिफारिशों पर ही की जानी चाहिए.
सीवीसी अधिनियम और आरटीआई अधिनियम के प्रावधान के तहत
दो अधिनियमों के तहत, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) और सर्तकर्ता आयुक्तों एवं केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) एवं सूचना आयुक्तों की नियुक्ति उच्च–स्तरीय समिति, जिसमें लोकसभा का नेता विपक्ष भी उसका हिस्सा हो, की सिफारिशों पर ही की जानी चाहिए.
हालांकि, इस उच्चस्तरीय समिति की संरचना के साथ
काम कर प्रावधानों को एक स्पष्टीकरण– सीवीसी अधिनियम की धारा
4 (1) और आरटीआई अधिनियम की धारा 12 (3) – में कहा गया कि अगर किसी भी नेता को नेता विपक्ष के तौर पर मान्यता नहीं
दी गई है तो सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को नेता विपक्ष माना जा सकता है.
इससे पहले अगस्त 2014 में, सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनावई के दौरान लोकपाल चयन पैनल में नेता
विपक्ष के न होने की बात पर चिंता व्यक्त की थी.
0 comments:
Post a Comment