केंद्र सरकार ने 8 सितंबर 2014 को कर्मचारियों को अपनी संपत्तियों और देनदारियों का ब्यौरा दाखिल करने के लिए 31 दिसंबर 2014 तक का समय दिया. पहले ब्यौरा जमा करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2014 थी.
लोकपाल अधिनियम, 2013 के मुताबिक केंद्र सरकार के कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से अपनी संपत्तियों, जीवनसाथी और आश्रित बच्चों का ब्यौरा देने की जरूरत है. कुछ सरकारी अधिकारियों द्वारा इन ब्यौरो को भरने में होने वाली समस्या के मद्देनजर समय सीमा को बढ़ाया गया.
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने लोक सेवक (सूचना और संपत्ति एवं देनदारियों की वार्षिक रिटर्न एवं रिटर्न दाखिल करने में संपत्ति पर छूट की सीमा प्रस्तुत करने) संशोधन नियम, 2014 के तहत समय सीमा में विस्तार को अधिसूचित किया था.
लोक सेवक (संपत्ति सूचना प्रस्तुत करना) संशोधन नियम, 2014
लोक सेवक (सूचना और संपत्ति एवं देनदारियों की वार्षिक रिटर्न एवं रिटर्न दाखिल करने में संपत्ति पर छूट की सीमा प्रस्तुत करने) संशोधन नियम, 2014 को लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 में अधिसूचित किया गया था.
नए नियम के मुताबिक केंद्र सरकार के कर्मचारियों को अपने नकद, बैंक जमा, बॉन्ड्स में निवेश, डिबेंचर, शेयर और कंपनियों एवं म्युचअल फंड्स में यूनिट्स, प्रॉविडेंड फंड, बीमा पॉलिसी, किसी व्यक्ति या इकाई को दिए गए व्यक्तिगत लोन और एडवांस और अन्य, का ब्यौरा देना होगा.
कर्मचारियों को अपने, अपने जीवन साथी और आश्रित बच्चों के मोटर वाहन, विमान, नौकाएं या जहाज, सोना और चांदी के गहने और बुलियन के बारे में भी जानकारी देनी होगी.
नियम यह भी कहता है कि सक्षण प्राधिकारी अगर लोक सेवक की संपत्ति का मूल्य उसका/की चार माह के बेसिक पे से कम या दो लाख रुपये, जो भी अधिक हो, तो अपनी संपत्ति के बारे में सूचना भरने से छूट दे भी सकता है.
नियम यह भी कहता है कि सक्षण प्राधिकारी अगर लोक सेवक की संपत्ति का मूल्य उसका/की चार माह के बेसिक पे से कम या दो लाख रुपये, जो भी अधिक हो, तो अपनी संपत्ति के बारे में सूचना भरने से छूट दे भी सकता है.
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