बुर्रा कथा की आखिरी प्रतिपादकों में से एक, दारोजी ईराम्मा का 12 अगस्त 2014 को कर्नाटक के बेलारी के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वे 84 वर्ष की थीं.
दारोजी ईराम्मा
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दारोजी ईराम्मा खानाबदोश जनजाति
बुडागा जंगम समुदाय से थीं.
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उन्हें बुर्रा कथा में असाधारण
विशेषज्ञता थी.
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उन्हें कन्नड़ विश्वविद्यालय, हम्पी ने कन्नड़ में डॉक्टरेट् की मानद उपाधि नाडोजा पुरस्कार से सम्मानित
किया था.
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वर्ष 1999 में उन्हें राजयोत्सव पुरस्कार, प्रसार भारती के
सर्वश्रेष्ठ लोक कलाकार पुरस्कार और वर्ष 2010 में जनपद श्री
पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
बुर्रा कथा के बारे में
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बुर्रा कथा पौराणिक और सामाजिक
विषयों पर आधारित कहानी कहने की लोक कला है.
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इसका प्रदर्शन आंध्र प्रदेश और
तेलंगाना के इलाकों में किया जाता है.
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इस कथा कला में प्रार्थना, नृत्य, गीत, कविताएं एवं
चुटकुले होते हैं.
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कहानी (कथा) वाद्य यंत्र तंबूरा
(बुर्रा) बजाते हुए मुख्य कहानीकार द्वारा कही जाती है.
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