‘राजनीति में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा’ शीर्षक से संयुक्त राष्ट्र की अध्ययन रिपोर्ट जारी-(04-MAY-2013) C.A

| Sunday, May 4, 2014
संयुक्त राष्ट्र महिला तथा सेंटर फॉर सोशल रिसर्च (सीएसआर) द्वारा राजनीति में महिलाओं के खिलाफ हिंसापर किए गए अध्ययन की रिपोर्ट 30 अप्रैल 2014 जारी की गई. अध्ययन के अनुसार, दक्षिण एशिया में राजनीति में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, कानूनों के अपर्याप्त कार्यान्वयन साथ ही पुलिस और न्यायपालिका से समर्थन की कमी के कारण बहुत बड़े पैमाने पर हैं.
यह अध्ययन भारत, नेपाल और पाकिस्तान में किए गए और इसमें इन देशों में 2003 से 2013 के मध्य हुई हिंसा की घटनाओं का विश्लेषण किया गया. यह अध्ययन महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को रोकने वाले कारकों की प्रकृति, विस्तार एवं उनका कारण जानने के लिए किया गया. इसमें शामिल उत्तरदाताओं में चुनाव आयोग के अधिकारियों, पुलिस, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव में भाग लेने वाले उम्मीदवारों एवं उनके परिवारों का साक्षात्कार लिया गया.
अध्ययन के मुख्य बिंदु
•    अध्ययन में पाया गया की इन देशों में महिला मतदाताओं के प्रतिशत और राष्ट्रीय निकायों में महिला प्रतिनिधित्व में कमी आई हैं. 60 प्रतिशत से अधिक महिलाएँ हिंसा के डर से राजनीति में भाग नहीं लेती वहीं लगभग 90 प्रतिशत महिलाएँ हिंसा को उनके राजनीति में शामिल होने के संकल्प को तोड़ती हैं.
•    दक्षिण एशिया में विश्व की जनसंख्या का पाँचवाँ हिस्सा रहता है और दक्षिण एशियाई की एक तिहाई महिलाएँ अपने जीवन भर में हिंसा का अनुभव करती हैं जो की दक्षिणी एशिया की राजनीति की एक सामान्य विशेषता हैं.
•    राजनीति में महिलाओं की तरह अलग अलग देशों में, कई प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ता हैं जैसे
a)    भारत के संदर्भ में महिलाएँ शारीरिक हिंसा, मौखिक और हिंसा की धमकी से ग्रस्त हैं, जैसा की भारत में महिला उम्मीदवारों में से 45 प्रतिशत शारीरिक हिंसा एवं धमकी का सामना करते हैं वहीं भारत की तुलना में नेपाल में केवल 21 प्रतिशत (शारीरिक हिंसा) और 16 प्रतिशत (धमकी) का सामना करते हैं.
b)    नेपाल और पाकिस्तान के मामले में महिला चरित्र हनन (एक महत्तर खतरा) का सामना करती हैं.
c)    हिंसा के अन्य रूपों की धमकी, अपहरण और हत्या हैं.
•    महिलाओं को प्रत्येक स्तर पर राजनीति में भाग लेने के उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है (वोट देने का अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार, संसाधनों के उपयोग और शिक्षा का अधिकार). मतदान के अधिकार से वंचित करना आमतौर पर महिला मतदाताओं द्वारा अनुभव किया जाता हैं वहीं महिला उम्मीदवारों को किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या चुनाव लड़ने के उनके अधिकार से वंचित रखा गया हैं.
•    यह अध्ययन प्रत्येक स्तर पर तत्काल कार्यवाही करने की संस्तुति करता हैं जिनमें
a)    विधि निर्माण
b)    राजनीतिक दल
c)    कानून को लागू करने वाली एजेंसी
d)    कानून को प्रभावित एजेंसी
•    इन स्तरों का चयन न्यूनतम 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ महिलाओं के लिए राजनीतिक आरक्षण का विस्तार करने के लिए किया गया हैं.
•    राजनीतिक दलों की सभी समितियों में अधिक महिला सदस्यों को शामिल करने का सुझाव भी दिया गया है.
•    चुनाव आयोग को महिलाओं को पहचान,सुरक्षा,बढ़ावा देने एवं महिलाओं की भागीदारी को संस्थागत रूप देने के लिए कदम उठाने की जरूरत हैं.
•    कई लैटिन अमेरिकी देश जैसे बोलीविया, इक्वाडोर, ग्वाटेमाला और मैक्सिको महिलाओं के खिलाफ हिंसा के सभी रूपों को रोकने और दंडित करने के लिए कानून बनाने पर ज़ोर दे रहे हैं.
•    यह अध्ययन प्रकट करता हैं की विधियों का अपर्याप्त कार्यान्वयन, पुलिस और न्यायपालिका से समर्थन की कमी, राजनीति के बारे में कम जागरूकता और नैतिक मूल्यों में समग्र गिरावट राजनीति में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारण हैं.


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