दक्षिण एशियाई देश म्यांमार में जनगणना अप्रैल 2014
के द्वितीय सप्ताह में संपन्न हुई.
दशकों तक सैन्य शासन के अधीन रहे बौद्ध बहुल आबादी वाले म्यांमार में तीन दशक बाद जनगणना कराई गई. लेकिन, अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों को जनगणना में शामिल नहीं करने के कारण इस जनगणना को लेकर विवाद भी पैदा हो गया है. म्यांमार के मनवाधिकार संगठनों और जातीय समूहों ने इस जनगणना को स्थगित करने की मांग की है.
म्यांमार रखाइन प्रांत में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को अपना नागरिक नहीं मानता जबकि उनकी बड़ी आबादी यहां बसती है. बहुसंख्यक बौद्धों और रोहिंग्या में खूनी संघर्ष हमेशा होते रहते है.
रखाइन की राजधानी सीत्वे में बौद्धों ने इस जनगणना में रोहिंग्या शब्द इस्तेमाल करने का विरोध किया था. उनका कहना था कि अगर इस शब्द का प्रयोग हुआ तो अल्पसंख्यक रोहिंग्या को वैधता मिल जाएगी.
विदित हो कि म्यांमार सरकार रोहिंग्या को बंगाली कहती है और उन्हें बांग्लादेश से आए प्रवासी बताती है.
दशकों तक सैन्य शासन के अधीन रहे बौद्ध बहुल आबादी वाले म्यांमार में तीन दशक बाद जनगणना कराई गई. लेकिन, अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों को जनगणना में शामिल नहीं करने के कारण इस जनगणना को लेकर विवाद भी पैदा हो गया है. म्यांमार के मनवाधिकार संगठनों और जातीय समूहों ने इस जनगणना को स्थगित करने की मांग की है.
म्यांमार रखाइन प्रांत में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को अपना नागरिक नहीं मानता जबकि उनकी बड़ी आबादी यहां बसती है. बहुसंख्यक बौद्धों और रोहिंग्या में खूनी संघर्ष हमेशा होते रहते है.
रखाइन की राजधानी सीत्वे में बौद्धों ने इस जनगणना में रोहिंग्या शब्द इस्तेमाल करने का विरोध किया था. उनका कहना था कि अगर इस शब्द का प्रयोग हुआ तो अल्पसंख्यक रोहिंग्या को वैधता मिल जाएगी.
विदित हो कि म्यांमार सरकार रोहिंग्या को बंगाली कहती है और उन्हें बांग्लादेश से आए प्रवासी बताती है.
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