थलसेना अध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने
2 अप्रैल 2014 को 'फील्ड
मार्शल सैम मानेकशॉ द मैन एंड हिज टाइम्स' शीर्षक से एक
पुस्तक का विमोचन किया.
जनरल बिक्रम सिंह ने सैम बहादुर के नाम से मशहूर भारतीय
थल सेना के सर्वश्रेष्ठ जनरलों में से एक फील्ड मार्शल एसएचएफजे मानेकशॉ
की जन्मशती के अवसर पर उनकी प्रतिमा का अनावरण किया और दिल्ली
कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में 'फील्ड मार्शल सैम
मानेकशॉ द मैन एंड हिज टाइम्स' शीर्षक पुस्तक का विमोचन
किया.
विदित हो कि फील्ड मार्शल एसएचएफजे मानेकशॉ ने वर्ष 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में भारत को विजय
दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके
परिणामस्वरूप नए देश के रूप में बंगलादेश का जन्म हुआ.
फील्ड मार्शल एसएचएफजे मानेकशॉ से संबंधित मुख्य तथ्य
मानेकशा का जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में एक पारसी परिवार में हुआ. मानेकशा ने प्रारंभिक शिक्षा अमृतसर में पाई, बाद में वे नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में दाखिल हो गए. वे देहरादून के इंडियन मिलिट्री एकेडमी के पहले बैच के लिए चुने गए 40 छात्रों में से एक थे. जहां से वे कमीशन प्राप्ति के बाद भारतीय सेना में भर्ती हुए. वर्ष 1969 में वे सेनाध्यक्ष बने. वर्ष 1973 मे उन्हे फील्ड मार्शल का सम्मान प्रदान किया गया. वर्ष 1973 में वे सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए. 27 जून 2008 को उनकी मृत्यु हो गई.
फील्ड मार्शल एसएचएफजे मानेकशॉ से संबंधित मुख्य तथ्य
मानेकशा का जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में एक पारसी परिवार में हुआ. मानेकशा ने प्रारंभिक शिक्षा अमृतसर में पाई, बाद में वे नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में दाखिल हो गए. वे देहरादून के इंडियन मिलिट्री एकेडमी के पहले बैच के लिए चुने गए 40 छात्रों में से एक थे. जहां से वे कमीशन प्राप्ति के बाद भारतीय सेना में भर्ती हुए. वर्ष 1969 में वे सेनाध्यक्ष बने. वर्ष 1973 मे उन्हे फील्ड मार्शल का सम्मान प्रदान किया गया. वर्ष 1973 में वे सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए. 27 जून 2008 को उनकी मृत्यु हो गई.
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