केंद्र सरकार ने जाट समुदाय को पिछड़ी जातियों की केंद्रीय सूची में
शामिल करते हुए 2 फरवरी 2014 को जाट
आरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी.
जाट आरक्षण के तहत जाट समुदाय से संबंधित व्यक्ति को केंद्र सरकार की नौकरियों में पिछड़े वर्ग के तहत आरक्षण का लाभ मिलेगा. जिसका फायदा देश के कुल नौ राज्यों के जाट समुदाय से संबंधित व्यक्ति को मिलेगा.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में 2 फरवरी 2014 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में जाट आरक्षण पर केंद्र सरकार का निर्णय आया. जिसके तहत उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड और राजस्थान (दो जिलों भरतपुर व धौलपुर को छोड़कर) में आरक्षण के लिए जाट समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची में शामिल करने को मंजूरी दी गई. गुजरात के जाट (मुस्लिम) एवं राजस्थान के दो जिलों को छोड़ बाकी केंद्र की पिछड़ा वर्ग सूची में पहले से ही शामिल थे.
जाट आरक्षण के प्रस्ताव पर विचार हेतु केन्द्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के नेतृत्व में गृह मंत्री, सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री और कार्मिक, प्रशिक्षण व पीएमओ में राज्यमंत्री को शामिल कर मंत्रियों का एक समूह (जीओएम) गठित किया गया था. इस संबंध में जीओएम ने दो विकल्प सुझाए थे. उनके आधार पर सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय ने जाट आरक्षण का रोडमैप केंद्रीय कैबिनेट को विचारार्थ भेजा था.
विदित हो कि केंद्र सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग के ताजा सर्वेक्षण का इंतजार किए बिना जाट आरक्षण प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की.
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