भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने
7 फरवरी 2014 को
समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों में कार्यरत पत्रकारों और गैर पत्रकारों के लिए
मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने का आदेश दिया. अपने फैसले में
सर्वोच्च न्यायालय ने वेतन ढांचे पर मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को बरकरार
रखा है और कर्मचारियों को संशोधित वेतन देने का निर्देश दिया है. सर्वोच्च
न्यायालय के निर्णय के अनुसार, संशोधित वेतन 11 नवंबर 2011 से लागू किये जाने हैं, जिस दिन केंद्र ने सिफारिशों को अधिसूचित किया था. सिफारिशें अप्रैल 2014
से कार्यान्वित होंगी और सभी बकाया राशि का भुगतान एक साल के
भीतर चार किश्तों में करना होगा और सिफारिशें अप्रैल 2014 से लागू होंगी. सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न समाचार पत्रों की याचिकाओं को
खारिज करने के बाद यह आदेश दिया, जिसमें वेतन बोर्ड की
सिफारिशों को चुनौती दी गयी थी. सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम
की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा निर्णय पारित किया गया. अपने फैसले
में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि बोर्ड ने अपनी सिफारिशें देने के लिये उचित
प्रक्रिया का पालन किया था और उसके तथा उसके गठन के बारे में लगाये गये आरोप सही
नहीं हैं. मजीठिया वेतन बोर्ड श्रम मंत्रालय ने 2007 में
मजीठिया वेतन बोर्ड का गठन किया था और इसके बाद जनवरी, 2008 से कर्मचारियों को मूल वेतन का 30 फीसदी
तदर्थता के आधार पर अंतरिम राहत देने की घोषणा की गई थी. वेतन बोर्ड ने 31 दिसंबर, 2010 को अपनी सिफारिशें सरकार को
सौंपी थीं जिन्हें केन्द्र सरकार ने 11 नवंबर,
2011 को अधिसूचित किया था. जस्टिस जीआर मजीठिया श्रमजीवी पत्रकार
और अन्य समाचार पत्र के कर्मचारीयों के लिए राष्ट्रीय वेतन बोर्ड के अध्यक्ष थे.
अपनी सिफारिश में बोर्ड ने उल्लेख किया है कि स्थापना के समय से निम्नतम वर्ग के कर्मचारी के लिए मासिक परिलब्धियों 5000
रुपए के न्यूनतम के मूल वेतन की बजाय 9000 रुपए शुरु होगा. हालांकि गैर पत्रकारों के लिए संशोधित मूल वेतन 9000
रुपए से 17500 रुपए तक की सीमा होगी.
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